विधानसभा चुनाव 2022 एग्जिट पोल के परिणाम 

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विधानसभा चुनाव 2022 एग्जिट पोल के परिणाम 

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EXPLAINER -क्या एग्जिट पोल परिणाम  या ये निश्चित ही होते हैं विश्वसनीय, क्या होती है इनकी सम्पूर्ण प्रक्रिया

गुजरात विधानसभा के लिए अभी गुजरात में चुनाव हो रहे हैं। आशा है कि ये वोटिंग शाम 06 बजे तक पूरी हो जाएगी। विधानसभा चुनाव के लिए मतदान का काम 12 नवंबर को ही हिमाचल राज्य में पूरा हो गया है।

जैसे ही गुजरात में चुनाव वोटिंग का काम समाप्त होगा एग्जिट पोल के द्वारा परिणाम दिए जाने शुरू हो जाएंगे। इस लेख में एग्जिट पोल की सम्पूर्ण प्रक्रिया के बारे में जानेंगे।

ये वास्तव में असली परिणाम तो नहीं होते लेकिन लोगों के वोट डालने की ओर इशारा करते हैं। लिकिन एग्जिट पोल द्वारा एक अनुमान के तहत परिणाम दिये जाते है। गुजरात में आखिरी चरण की वोटिंग समाप्त होने के बाद लगभग शाम 06 बजे के आस पास एग्जिट पोल के द्वारा परिणाम घोषित किये जा सकते हैं।

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एग्जिट पोल के परिणाम बड़े पैमाने पर वोटरों से बातचीत के बाद ही घोषित किये जाते हैं, कई संघटन मिलकर एग्जिट पोल का काम कर रहे हैं।

हिमाचल प्रदेश और गुजरात में 05 दिसंबर को शाम 06 बजे के बाद जब मतदान समाप्त होने की घोषणा के साथ वोटिंग परिणाम की घोषणा करेगा, उसके बाद एग्जिट पोल के अनुमान के तहत परिणाम आने शुरू हो जाएंगे।

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हालांकि कुछ लोग एग्जिट पोल को सही नहीं मानते हैं तो कुछ लोग मानते हैं कि ये वास्तव विश्वसनीय होते हैं। ये काफी सीमा की हद तक बता देते हैं कि चुनावों में क्या होने जा रहा है। जीत की बाजी लगभग कौन मारेगा l

वैसे एग्जिट पोल असली में लोगों से बात चीत करने के बाद एक अनुमान के अंतर्गत उचित निष्कर्ष निकालने की कोशिश होती है। लोगों से बातचीत करके अनुमान लगाया जाता है कि परिणाम किस की जीत की ओर जा सकते हैं।

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इसके द्वारा सिर्फ अनुमान लगाया जाता है कि कौन सा दल कहां से जीत रहा है और कौन कहां पीछे होगा। हालांकि एग्जिट पोल द्वारा दिये गये परिणामों को लेकर हमेशा आशंका रही है।

हालाकी देश के दो राज्यों में हिमाचल प्रदेश और गुजरात में विधानसभा चुनाव हुये है।हिमाचल प्रदेश में एक चरण के चुनावों की वोटिंग 12 नवंबर को हो चुकी हैं। हिमाचल प्रदेश के विधानसभा में कुल 68 सीटें हैं। जिसमें पिछले चुनावों में बीजेपी ने 45 और कांग्रेस ने 20 सीटों पर जीत हासिल की थीं जबकि 03 सीट निर्दलीय दल जीता था।

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इस बार दो चरणों में गुजरात विधानसभा चुनाव हुये है। पहले चरण के लिए 01 दिसंबर को वोटिंग हुई थी। जबकि दूसरे चरण के लिए 05 दिसंबर को वोटिंग कराई गई थी।

गुजरात विधानसभा अंतर्गत कुल 182 सीटें सम्मिलित है जिसमें एग्जिट पोल के तहत 110 सीटों पर बीजेपी का कब्जा था तो कांग्रेस के पास 60 सीटें थीं और अन्य के पास 04 जबकि 08 सीटें पर खाली होने अनुमान था

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एग्जिट पोल को लेकर चुनाव आयोग के नियम क्या है?

चुनाव आयोग ने कुछ नियम बनायें है कि आखिरी चरण की वोटिंग के पहले एग्जिट पोल के द्वारा अनुमानित परिणामों का सही आंकड़ा नहीं बताया जा सकता है। सिर्फ अनुमानित तौर पर कुछ संभावित परिणामों को बताया जा सकता है।

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आखिरी चरण की वोटिंग के बाद चुनाव आयोग आधिकारिक तौर पर बतायेगा कि आखिरी चरण में कितना मतदान हुआ है। उसके बाद टीवी चैनल्स और कुछ समाचार पत्र एग्जिट पोल के द्वारा प्राप्त परिणामों को दिखा पायेंगे ।

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चूंकि एग्जिट पोल की सही एवं गलत होने पर हमेशा ही स्वाभाविक रुप से सवाल उठते रहे हैं। ये सवाल उठना स्वाभाविक है कि ये एग्जिट पोल्स क्या होते हैं और चुनाव परिणामों को लेकर वे जो अनुमान लगाते हैं, वो कितने सही एवं गलत होते हैं। इसकी आशंका लोगों के मन में बनी रहती है।

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एग्जिट पोल्स क्या होते हैं और वो कैसे तैयार किए जाते हैं?

एग्जिट पोल्स वोटिंग करने के लिए आए लोगों से बातचीत या उनके द्वारा प्राप्त जानकारी पर आधारित हैं। इनके आधार पर अनुमान लगाया जाता है कि परिणामों में आंकड़े किस दल के अधिक है।

 एग्जिट पोल के परिणामों को निकालने के लिए बड़े पैमाने पर वोटरों से बात की जाती है। इनके द्वारा प्राप्त आकडों को एकत्रित करने का काम आजकल कई संघठन कर रहे हैं।

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एग्जिट पोल्स को दिखाने की अनुमति वोटिंग खत्म होने के बाद ही क्यों दी जाती है इससे पहले क्यों नहीं?

जनप्रतिनिधित्व कानून 1951 की धारा 126 ए के तहत वोटिंग के दौरान ऐसी वस्तु या कोई चीज नहीं होनी चाहिए जिसके द्वारा वोटरों पर असर डाले या उनके मत देने के फैसले को प्रभावित करे।

वोटिंग समाप्त होने के डेढ़ घंटे तक एग्जिट पोल्स का खुलासा नहीं किया जा सकता है। और एग्जिट पोल्स का खुलासा तभी हो सकता है जब सारे चुनावों की वोटिंग समाप्त हो चुकी हो।

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एग्जिट पोल्स हमेशा सही होते हैं क्या?

ऐसा बिल्कुल नहीं है कि एग्जिट पोल्स हमेशा सही हो। इससे पहले कई बार देखा गया कि एग्जिट पोल्स द्वारा जो अनुमान परिणाम लगाए गये वो गलत साबित हुयें भारत में एग्जिट पोल द्वारा अनुमानित दिये गये परिणाम इतिहास में बहुत सटीक सावित नहीं हुये है। कई बार तो एग्जिट पोल द्वारा घोषित परिणाम के बिल्कुल विपरीत देखने को मिले हैं।

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ओपिनियन पोल्स और एग्जिट पोल्स में अंतर 

ओपनियन पोल्स वोटिंग से बहुत पहले वोटरों के व्यवहार के बारे जानकारी प्राप्त करने के लिए होता है। इससे द्वारा यह अनुमान लगाया जाता है कि इस बार वोटर किस दल ओर अधिक जाने का मन बना रहे है। वहीं एग्जिट पोल्स हमेशा वोटिंग समाप्त हो जाने बाद होता है। एग्जिट पोल्स द्वारा वोटिंग समाप्ति के बाद अनुमानित परिणाम दिखाए जाते है।

एग्जिट पोल्स कब शुरू हुए?

माना जाता है कि एग्जिट पोल्स की शुरुआत 1967 में हुई थी। सामने एक डच समाजशास्त्री और पूर्व राजनेता मार्सेल वान डेन ने देश में चुनाव के समय एग्जिट पोल्स का उपयोग किया था।

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 इसी साल अमेरिका में पहली बार एक राज्य के चुनावों के दौरान एग्जिट पोल्स के द्वारा अनुमानित परिणाम दिखाए गये थे। कहा जाता है कि 1940 में भी एग्जिट पोल्स द्वारा अनुमान के तहत प्राप्त आकड़ों के आधार पर परिणाम दिखाए गये थे।

एग्जिट पोल्स का विरोध क्यों होता रहा है?

एग्जिट पोल्स आमतौर पर ये न तो वैज्ञानिक होते हैं और न ही बहुत ज्यादा लोगों से बात चीत कर उसके द्वारा प्राप्त आकड़ों के आधार पर परिणाम तैयार किए जाते हैं।इसीलिए इनके द्वारा तैयार किये गये परिणाम में हकीकत नहीं होती है। कई देशों में एग्जिट पोल्स पर रोक लगाने की मांग होती रही है।

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भारत में वर्ष 2014 के लोकसभा चुनावों में चुनाव आयोग ने इस पर रोक लगा दी थी। अधिकतर लोग दुनिया भर में इनके द्वारा तैयार किये गये परिणाम को विश्वास योग्य नहीं मानते है।

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