कंकाल तंत्र क्या है ? कंकाल के बारे पूरी जानकारी

 दोस्तों आज हम बात करने वाले हैं अपने शरीर के कंकाल तंत्र के बारे में और जानेंगे सारे कंकाल तंत्र के अंदर क्या-क्या होता है कौन-कौन सी हड्डियां होती हैं और कंकाल तंत्र के अंदर जितना भी चीजें होती हैं,

सारी हड्डियां मांसपेशियां पीछे तंत्र हम उन सभी के बारे में आज जानेंगे तो आइए कंकाल तंत्र को आज हम अच्छे से जान लेते हैं

इस पेज पर क्या क्या है

कंकाल तंत्र क्या है ?

 कंकाल तंत्र जी मोर जंतुओं का एक ऐसा ढांचा होता है जिससे हमारा शरीर या जिम को शरीर बनता है अंकल सिंह को आंतरिक अंगों की रक्षा करता है तथा जंतुओं को चलने फिरने में सहायता करता है

 कंकाल तंत्र दो प्रकार का होता है

1 – बाह्य कंकाल,

2 – आंतरिक कंकाल.

बाह्य कंकाल क्या है ?

यह शरीर के बाहर होता है और शरीर के संपूर्ण अंगों की रक्षा प्रदान करता है,

जैसे – केकड़ा, तिलचट्टा, मकड़ी, तिड्डा, चीटी, घोंधा, सीपी इत्यादि.

Remark – कछुआ में आंतरिक तथा बाह्य दोनों प्रकार का कंकाल तंत्र पाया जाता है इसके हाथ-पांव सिर में आंतरिक कंकाल तथा शेष शरीर बाह्य कंकाल का होता है.

 आंतरिक कंकाल क्या है

 यह ऐसा कंकाल तंत्र है जो शरीर के अंदर मांसपेशियों के नीचे होता है यह शरीर को आंतरिक अंगों की रक्षा प्रदान करता है,

जैसे – कुत्ता, बिल्ली, मानव, सांप आदि.

  •  कंकाल तंत्र अस्थि और उपास्थि से मिलकर बनता है.
कंकाल तंत्र क्या है ? कंकाल के बारे पूरी जानकारी
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 उपास्थि क्या है ?

 यह मुलायम होता है क्योंकि इसमें केवल कैल्शियम फास्फेट पाया जाता है इसमें कैल्शियम कार्बोनेट नहीं पाया जाता है यह नाक, कान एवं सभी हड्डियों के शीर्ष भाग पर पाया जाता ह

अस्थि क्या है ?

 यह अत्यधिक कठोर होता है क्योंकि इसके CA3(Po4)2 के साथ साथ CACO3 दोनों पाया जाता है, अस्थियो मे 54 से 58% Ca3(Po4)2 पाया जाता है.

  •  हस्तियों में रक्त नलिका और तंत्रिका तंत्र पाए जाते हैं,
  •  हस्तियों में 50% जल और 50% कार्बनिक पदार्थ पाए जाते हैं,
  • उपास्थियों में तंत्रिका तंत्र और रक्त नलिका नहीं होती लेकिन भोजन और ऑक्सीजन की आपूर्ति लसीका के द्वारा होती है,
  • अस्थि में ओसीन प्रोटीन पाया जाता है जबकि उपास्थि में काण्ड्रीन प्रोटीन पाया जाता है,
  •  30 वर्ष की अवस्था में हड्डियों का घनत्व अधिक होता है,
  •  जन्म के समय हड्डियों की संख्या 270 से 310 के बीच होती है, अर्थात जन्म के समय औसत हड्डियों की संख्या 300 होती है
  •  बाल्यावस्था में हड्डियों की संख्या 208 होती है,
  •  वयस्क मनुष्य के शरीर में हड्डियों की संख्या 206 होती है,
कंकाल तंत्र क्या है ? कंकाल के बारे पूरी जानकारी
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मानव शरीर के समस्त अस्थियों को कितने भागो मे बाटते है ?

मानव शरीर के समस्त अस्थियों को दो भागों में बांटते हैं –

1 – अनुबंधीय उपांगी,(Appendicular)

2 – अक्षीय (Axial)

अनुबंधीय उपांगी क्या है ?

 यह शरीर को सीधा रखने तथा गति प्रदान करने में सहायक है उपांगी की कुल संख्या 126 है 

A – हाथ = 30×2 = 60

  1. ह्यूमरस = 1
  2. रेडियस = 1
  3. अलना = 1
  4. कार्पल (कलाई) = 8
  5. मेटाकार्पल (हथेली) = 5
  6. फ्लेज़िंज (अंगुली) = 14

      ———————————–

                   30×2 = 60

      _____________________

B – पैर = 30×2 = 60

  1. फीमर = 1
  2. पटेला = 1
  3. टिबिया = 1
  4. फिबुला = 1
  5. मेटाटार्शल = 5
  6. टार्शल = 7
  7. फ्लेजिज़ = 14

__________________

              30×2 = 60

__________________

C – पेेलविक (श्रेणी मंजिला) = 2

D – केलविक (हॅसली) = 2

E – स्केपुला (अंश मेखला) = 2

अक्षीय (Axial) क्या है ?

यह शरीर के बीचो-बीच में होती है यह शरीर के अंदर कोमल अंगों की रक्षा करती है अक्षीय की कुल संख्या 80 होती है.

  1. कशेरुक दंड/मेरु दंड = 26 (प्रारम्भ मे 33)
  2. Ribs (पसली) = 24
  3. स्तनर्म = 1 (Ribs को आपस मे जोड़ती है)
  4. सिर/खोपड़ी = 29

खोपड़ी

चेहरा – 14

कान – 6

Head – 1

कपाल – 8

हड्डियों के बारे मे

  •  गर्दन में हड्डियों की संख्या 7 होती है,
  •  कान में हड्डियों की संख्या 6 होती है
  • MIS –

M – मेलियस,

I – इनकस

S – स्टेप्स (6mm)

  •  शरीर की सबसे छोटी हड्डी स्टेप्स है (कान मे)
  • सबसे बड़ी हड्डी फीमर (उरु) अस्थि है (जाँघ),
  •  सबसे मजबूत हड्डी जबड़े की हड्डी होती है
  •  सबसे कमजोर हड्डी केलविक (कोलर/हसली) होती है,
  •  सबसे चमकीली हड्डी टिबिया होती है,
  •  पैर की हड्डी खुजली होती है,
  •  पटेल साइस्माइड बान का बना होता है,
  •  जब हम बैठते हैं तो इसीयम नामक हड्डी पर जोर पड़ता है जो पेलविक का एक भाग है,
  •  जहां मांसपेशियों तथा अस्थियां मिलती हैं उसे केंनड्रा कहते हैं,
  •  जहां एक अस्थि दूसरी अस्थि से मिलती है उसे लिंगामेंट कहते हैं,
  • अस्थियों के जोड़ के पास सायनोवियल नामक द्रव पाया जाता है जो हड्डियों को मुड़न में मदद करता है इसी द्रव की कमी से गठिया नामक रोग हो जाता है,
  • खोपड़ी में पीछे की ओर एक खाली खोखला जगह होता है जैसे फोरमिन मेगनेम कहते है.

 अस्थि कोशिका के प्रकार

 अस्थि कोशिका तीन प्रकार की होती है

  • Osteo Clast: यह खराब अस्थि कोशिकाओं को खाकर खत्म करता है अतः इसे Bone Eating Cell कहते हैं
  • Osteo-Blast: यह अस्थि का निर्माण करता है अतः Bone Forming Cell कहते हैं,
  • Osteo Cyte: यह अस्थियों को परिपक्व बनाता है अतः इसे Mature Cell कहते हैं

अस्थि मज्जा किसे कहते हैं

 अस्थियों के बीच की जालीनुमा आकृति को अस्थि मज्जा कहते हैं, अस्थिमज्जा में RBC का निर्माण होता है

सन्धि क्या है ?

 कंकाल का वह स्थान जहां स्त्रियां मिलकर हिंडोली सकती हैं संधि कहलाता है, संधि वाले स्थान पर एक गुहा (खाली जगह) पाया जाता है जिसे सायनोवियल गुहा कहते हैं

अचल सन्धि किसे कहते है ?

इस संधि को रेशेदार संधि भी कहते हैं यह थोड़ा भी गति नहीं करता या खोपड़ी तथा दांत में पाया जाता है.

अपूर्ण सन्धि किसे कहते है ?

 यह संधि जहां पाई जाती है वहां थोड़ा मोड़ा गति देखने को मिलता है जैसे पर कशेरुक दंड.

पूर्ण सन्धि किसे कहते है ? प्रकार

यहां संधि अस्थियों को विभिन्न दिशा में गति प्रदान करता है यह पांच प्रकार की होती है

  • कन्दुक खल्कि – इस प्रकार की संधि में गुहा होती है तथा जो हड्डी इससे जुड़ती है उसका उपरी भाग गोल होता है यह सभी दिशाओं में घूम सकती है जैसे कि पेलविक, फीमर, स्केपुला, ह्यूमरस.
  • कब्ज़ा सन्धि – यह संधि केवल एक ही और गति करने की अनुमति देती है जैसे कि कहुनी, घटना 
  • खूँटी सन्धि – इसका आकार खूंटी के समान होता है यह एक दूसरे के ऊपर रखी हुई रहती है, जैसे कि कशेरुक दंड का ऊपरी भाग तथा निचला भाग.
  • Gliding Joints – यह एक दूसरे पर फिसलती है और थोड़ा गति प्रदान करती है जैसे कापल, टार्सल.
  • Saddle Joints – यह Ball और सॉकेट जॉइंट के ही समान होता है किंतु यह एक निश्चित सीमा के अंदर ही सभी दिशा में गति करता है जैसे अंगूठा.

बनावट के अनुसार हड्डियों का प्रकार

 बनावट के अनुसार हड्डियां पांच प्रकार की होती हैं –

  • चपटी हड्डी – यह हड्डी शरीर के आंतरिक अंगों की रक्षा करती है जैसे पसली.
  • लम्बी हड्डी – यह शरीर का भार रोकती है जैसे हाथ, पैर 
  • छोटी हड्डी – यह आकार में छोटे होते हैं तथा स्थायित्व  प्रदान करते हैं जैसे टार्जल, कार्पल.
  • अनियमित हड्डी – इसका आकार अलग अलग रहता है जैसे कशेरुक दंड की सभी हड्डियां यह हल्का गति प्रदान करता है.
  • Sismoide Bone – यह Cartilege का ही कठोर रूप होता है जैसे पटेला.

पेशीय तंत्र (Muscular System) प्रकार

  •  मांसपेशियां शरीर में त्वचा के अंदर पाई जाती हैं मांसपेशियां की कुल संख्या 639 या 659 होती हैं, सबसे बड़ी मांसपेशियां सारटोरियस जांघ में है सबसे छोटी मांसपेशियां स्टेपड्स (कान) में है,
  •  मांसपेशियों में सोयाबीन नामक प्रोटीन पाया जाता है,
  •  मांसपेशियों में लैक्टिक एसिड के जमाव के कारण थकान महसूस होता है

मांसपेशियां तीन प्रकार की होती हैं

  • ऐच्छिक,
  • अनैच्छिक,
  • ह्रदयक.

ऐच्छिक मांसपेशियां किसे कहते हैं

 यह मांसपेशियां हमारी इच्छा अनुसार कार्य करती हैं इन्हीं के कारण हम गति कर पाते हैं यह मांसपेशियां कंकाल से जुड़ी रहती हैं तथा इन्हें कंकाली पेशियां भी कहते हैं इसमें लाइट बैंड तथा डार्क बैंड पाया जाता है,

अनैच्छिक मांसपेशियां किसे कहते हैं

 यह पेशियां हमारी इच्छा के अनुसार कार्य नहीं करती हैं क्योंकि यह कंकाल से जुड़ी नहीं रहती हैं इनमें लाइटबेंड तथा डार्क बैंड नहीं पाया जाता है 

ह्रदयक पेशिया किसे कहते हैं

ये अनैच्छिक पेशियों का ही एक प्रकार है जो हृदय में पाया जाता है यह भी हमारी इच्छा अनुसार कार्य नहीं करता है

Remark – एक मांसपेशी को दूसरी मांसपेशी से जोड़ने का काम Seloxer नामक पेशी के कारण सिकुड़ जाता है, जबकि Extenser नामक पेशी के कारण फैल जाता है.

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कंकाल तंत्र क्या है ? कंकाल के बारे पूरी जानकारी

यह अत्यधिक कठोर होता है क्योंकि इसके CA3(Po4)2 के साथ साथ CACO3 दोनों पाया जाता है, अस्थियो मे 54 से 58% Ca3(Po4)2 पाया जाता है.

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