अध्यात्मवाद और आध्यात्मिकता क्या है ?

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आज के समय प्रत्येक मनुष्य अपने जीवन कई प्रकार की परेशानियों और तकलीफों के कारण किया जाता है ऐसे में उसका मन हमेशा शांत रहता है अगर आप भी ऐसी परिस्थितियों का सामना कर रहे हैं

तो आपको अध्यात्मवाद और आध्यात्मिकता को अपने जीवन में आत्मसात करना चाहिए ताकि उसके मन को शांति की प्राप्ति हो क्योंकि ऐसा कहा जाता है कि जो व्यक्ति अध्यात्मवाद और आध्यात्मिकता का अपने जीवन में अनुसरण करता है उसे ईश्वर की प्राप्ति होती है,

क्योंकि ऐसा कहा जाता है कि अध्यात्मा स और आध्यात्मिकता का सीधा संबंध भगवान से होता है ऐसे में बहुत सारे लोगों के मन में सवाल आता होगा कि आखिर अध्यात्मवाद और आध्यात्मिकता क्या है अगर आप भी ऐसी चीजें इंटरनेट पर सर्च करते हैं

तो आप बिल्कुल सही वेबसाइट आ गए क्योंकि हम यहां पर आपको इसके बारे में विस्तार पूर्वक जानकारी देंगे इसलिए आप हमारे साथ आर्टिकल पर आखिर तक बने रहे हैं चलिए शुरू करते हैं

अध्यात्मवाद क्या है ?

आध्यात्मिक एक ऐसा शब्द है जिसे प्रभावित करना काफी कठिन है लेकिन इसके विषय में जो कहा गया है उसके अनुसार आध्यात्मिक का अर्थ है अपने भीतर के चेतन तत्व को जानना है गीता के आठवें अध्याय में  अपने स्वरुप अर्थात् जीवात्मा को अध्यात्म कहा गया है ‘परमं स्वभावोऽध्यात्मुच्यते’। आज के समय योग, प्राणायाम और ध्यान को ही अध्यात्म समझा जाता लेकिन इसे प्राप्त करने के लिए आपको साधना करनी होगी,

अध्यात्मवाद और आध्यात्मिकता क्या है
अध्यात्मवाद और आध्यात्मिकता क्या है

अध्यात्म ऐसी विद्या है अगर आप इसे जान जाते हैं तो आपको कोई दूसरे विद्या जानने की जरूरत नहीं है इसके माध्यम से आप ईश्वर की प्राप्ति भी कर पाएंगे ‘आत्मनि अधि इति अध्यात्म:’ अध्यात्म के द्वारा मोक्ष की प्राप्ति होती है। अर्थात् इसके द्वारा जीवन और मरण के चक्र से मुक्ति मिलती है।

आध्यात्मिकता क्या है

लोगों को आध्यात्मिकता के विषय में भारत धारणा है लोगों को लगता है कि आध्यात्मिकता का मतलब होता है कि जीवन से भाग जाना और साथ में जीवन में आनंद लेना वर्जित होता है और लोगों को लगता है कि कष्ट झेलने वाला व्यक्ति आध्यात्मिकता के मार्ग पर चल पाएगा जो कि बिल्कुल गलत जबकि सच्चाई यह है कि आध्यात्मिक होने के लिए आपके बाहरी जीवन से कोई लेना-देना नहीं आजा बेटा का किसी भी धर्म संप्रदाय या मत से कोई संपर्क नहीं होता है I

आध्यात्मिक होने का मतलब है, भौतिकता से परे जीवन का अनुभव कर पाना। अगर आप सृष्टि के सभी प्राणियों में ईश्वर के दर्शन करते हैं तो उसे हम लोग आध्यात्मिकता कहते हैं सबसे महत्वपूर्ण बात कि अगर आपको इस बात का बहुत है कि आपके दुखों क्रोध अखिलेश के लिए दूसरा कोई नहीं बल्कि आप स्वयं जिम्मेदार हैं तो यकीनन आप आध्यात्मिकता के मार्ग पर चल सकते हैं

अगर आपको आप जो भी कार्य करते हैं आप अगर सभी के बधाई के लिए काम करते हैं तो आप आध्यात्मिक तक के मार्ग पर तेजी पाएंगे अगर आप अपने अहंकार क्रोध राजगीर लाल आदित्य जैसी चीजों को पूरी तरह से त्याग देते हैं लेकिन आप एक आध्यात्मिक जीवन व्यतीत कर पाएंगे,

इसके अलावा परिस्थिति चाहे कितनी भी विकट क्यों ना हो अगर आप अपने मन में हमेशा खुश रहते हैं तो अगर आपके अंदर अगर सृष्टि के सभी प्राणियों के लिए करुणा फूट रही है, तो आप आध्यात्मिक है

अध्यात्मवाद और आध्यात्मिकता क्या है
अध्यात्मवाद और आध्यात्मिकता क्या है

आध्यात्मिकता कैसे प्राप्त करें?

आध्यात्मिकता को प्राप्त कैसे करें तो हम आपको बता दें कि आध्यात्मिकता कोई ज्ञान नहीं है जिसे आप अर्जित कर सकते हैं बल्कि इसके लिए आपको निरंतर साधना तपोबल करना होगा तभी जाकर आप इसे प्राप्त कर पाएंगे I

आध्यात्मिकता में रुचि रखने की उम्र

लोगों का ऐसा मानना है कि आध्यात्मिकता का समय बुढ़ापा का होता है क्योंकि उस समय व्यक्ति के पास कोई भी जिम्मेदारी नहीं होती है लोगों के अनुसार बचपन में तो आदमी को खेलना कूदना लिखना पढ़ना चाहिए ,युवा अवस्था में मौज करनी चाहिए और अपने घर गृहस्थी को संभालना चाहिए ।बुढ़ापे में या वृद्ध अवस्था में व्यक्ति के पास कोई भी काम नहीं होता है ऐसे में उसे अपना पूरा जीवन पर ईश्वर के चरणों में अर्पित कर आध्यात्मिकता का साधना करना चाहिए,

जो की बात बिल्कुल गलत है क्योंकि महाभारत के समय अर्जुन ने कृष्ण का संग करके कोई वैराग्य नहीं लिया, वह गृहस्थ में रहे। बचपन से ही हमें आध्यात्मिकता का आत्मसात अपने अंदर झांकना चाहिए ताकि आपको पूरा जीवन आनंद की प्राप्ति हो सके,

जमाने में हमारे पूर्वज तो जंगल और गुरुकुल आश्रम में ही अपने पुत्र पुत्रियों को पढ़ने के लिए भेजा करते थे जहां पर उन्हें आध्यात्मिकता का ज्ञान करवाया था यही वजह थी कि वे अपने जीवन को अति खुशी के साथ बैठक करते थे और सभी प्रकार के समस्याओं का समाधान भी निकालते थे हमारे पूर्वजों का मानना था कि आध्यात्मिकता शिक्षा ही ज्ञान का मूल मंत्र है

 अगर आप को ज्ञान की प्राप्ति करनी है तो आपको अपने अंदर आध्यात्मिकता का आत्मसात करना होगा आप इसके माध्यम से विषम परिस्थितियों में भी अपना मार्ग प्रशस्त कर सकते हैं और उपस्थित या कैसी भी हो आपके चेहरे पर हमेशा सफलता के भाव रहेंगे

कुल मिला कर अध्यात्मिक शक्ति से छोटी उम्र से जुड़ कर , इसे अपनी दिनचर्या में अपना कर, सारी जिंदगी हम प्रसन्नता से व्यतीत कर सकते हैं। खुशियाँ ही खुशियों भरा अपना जीवन बना सकते हैं।

आजकल धर्म परिवर्तन होने लगा है, लेकिन आध्यात्मिकता मे ये सब नहीं है.

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