Osho ने आखिर क्यों कहा 'नक्शो में मत पड़ना मनोदशाएं है'

BY MUKESH

ओशो कहते है नर्क कहीं और नहीं, प्रेम में जीना ही स्वर्ग है और घृणा में जीना नर्क है

ओशो कहते है सारा खेल मन का है, मन ही फसाये है

स्वर्ग मित्रो के बीच जीने का नाम है, नर्क - शत्रुओ के बीच जीना का नाम है

ध्यान रखना इस संसार में बैर से बैर शांत नहीं होता,  अबैर से बैर ख़त्म होता है

कुछ लोग बदला लेने की भावना से, लोग बोलते नहीं लेकिन मन में रखे रहते है बदला लेने का भाव कभी खुल के जीने नहीं देगा

जब आप संसार को मित्रो की भांति देखते है तो सारा संसार आपके लिए मित्र हो जाता है, ऐसा नहीं की सारा जगत मित्र हो जायेगा, लेकिन तुम्हारे लिए जगत मित्र हो जायेगा

नक्शो में मत पड़ना सब मनो दर्शाये है, क्योकि अपने देखा होगा मन हमेशा एक जैसा बना नहीं रहता, वो बदलता रहता है , आज कुछ और कल कुछ और..

तुम कभी दुश्मन मत बनाना, क्योकि फिर आप दोनों तरफ से फस जायेगे, मन परेशान करेगा