Osho: अच्छे होने के साथ बड़ी कठनाईया है क्यो ?

BY MUKESH

विकाश दिव्यकीर्ति कहते है दुश्मन मत बनाओ

क्योकि अगर आप भी सामने वाले के जैसे बन जायेगे तो उसमे और आपमें क्या अंतर

आप भी वही बन गए जो वो है, इसलिए स्वयं जो हो वो बनो

दिव्यकीर्ति जी कहते है की अगर में किसी के उकसाने से में उसके जैसा हो गया तो जीता तो वही -

तो में, में ही नहीं रहा तो लड़ाई तो कोई और कर रहा है, 

बिना उससे लड़े बाहर निकलना ये विवेक है

सामने वाले व्यक्ति का तो स्वाभाव है गंदगी में लौटना, उसको आप गन्दा भी नहीं कर सकते

सबसे अच्छा ये है की वहां से निकल जाना, ना दोस्ती ना दुश्मनी, LET GO.